भारत में आज भी कई लोग एसे है जो किराये के माकन में रहते है कारन उनको नौकरी, एजुकेशन के लिए उनको अपने घरसे दूर सिटी जाना होता है। एसे में उनको घर किराए पर लेना पड़ता है। लेकिन बिना सही House Rent Agreement (किराया समझौता) के यह काम करना भविष्य में कानूनी परेशानी पैदा कर सकता है।

इस लेख में हम जानेंगे कि House Rent Agreement क्या होता है, क्यों जरूरी है, कैसे बनाया जाता है और किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
House Rent Agreement क्या होता है?
भारत में आज के समय में घर किराए पर लेना या देना आम बात है, लेकिन बिना सही दस्तावेज के किया गया समझौता भविष्य में बड़ी परेशानी बन सकता है। इसी समस्या से बचने के लिए House Rent Agreement बनाया जाता है। यह एक कानूनी तरिके से लिखा हुवा समझौता होता है, जो मकान मालिक और किरायेदार के बीच बनाया जाता है।
इसमें घर से जुड़ी सभी शर्तें लिखी होती हैं जैसे –
- किराया (Rent Amount)
- सिक्योरिटी डिपॉजिट
- किराए की अवधि
- जिम्मेदारियाँ और नियम
House Rent Agreement क्यों जरूरी है?
House Rent Agreement इसलिए जरूरी है क्योंकि यह मकान मालिक और किरायेदार दोनों लोगो के अधिकारों और जिम्मेदारियों को कानूनी रूप से स्पस्ट किया जाता है। बिना एग्रीमेंट के किए गए किराए के लेन-देन में गलतफहमी और विवाद होने की संभावना ज्यादा रहती है।
मकान मालिक के लिए जरूरी
- समय पर किराया मिलने की लिखित गारंटी
- प्रॉपर्टी की सुरक्षा और नुकसान पर जिम्मेदारी तय
- कानूनी सबूत किसी विवाद की स्थिति में मददगार
- नियम उल्लंघन पर कार्रवाई का अधिकार
किरायेदार के लिए जरूरी
- तय किराया और शर्तें मनमानी बढ़ोतरी से बचाव
- नोटिस पीरियड की सुरक्षा अचानक घर खाली कराने से बचाव
- एड्रेस प्रूफ और पुलिस वेरिफिकेशन में उपयोग
- सिक्योरिटी डिपॉजिट की वापसी की स्पष्ट शर्तें
House Rent Agreement में क्या-क्या शामिल होना चाहिए?
एक सही और कानूनी रूप से मजबूत House Rent Agreement में नीचे दी गई जानकारियाँ ज़रूर होनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी तरह का विवाद न हो:
- मकान मालिक और किरायेदार का विवरण :- पूरा नाम, पता, पहचान प्रमाण (आधार / पैन)
- प्रॉपर्टी का पूरा विवरण :-घर/फ्लैट का पूरा पता, फ्लोर, रूम की संख्या, फर्निश्ड / सेमी-फर्निश्ड / अनफर्निश्ड स्थिति
- किराया (Rent Amount):- मासिक (month) किराया, भुगतान की तारीख, भुगतान का तरीका (कैश/ऑनलाइन), लेट पेमेंट चार्ज (अगर हो)
- सिक्योरिटी डिपॉजिट :-जमा की जाने वाली राशि, वापसी की शर्तें, कटौती की स्थिति
- एग्रीमेंट की अवधि :- किराया शुरू होने की तारीख, समाप्ति तिथि (अक्सर 11 महीने)
- मेंटेनेंस और बिल्स :-बिजली और पानी का बिल कौन देगा, सोसाइटी/मेंटेनेंस चार्ज, छोटे-बड़े रिपेयर की जिम्मेदारी
- नोटिस पीरियड :-घर खाली करने से पहले कितना नोटिस देना होगा, अचानक एग्रीमेंट खत्म करने की शर्तें
- नियम और प्रतिबंध :- सब-लेटिंग की अनुमति या मनाही, पालतू जानवर (Pets) से जुड़े नियम, कमर्शियल उपयोग पर रोक
- एग्रीमेंट समाप्ति की शर्तें :- नियम उल्लंघन पर कार्रवाई, समय से पहले समाप्ति के नियम
- साइन और गवाह :-मकान मालिक के साइन, किरायेदार के साइन, 2 गवाहों के साइन

House Rent Agreement कितने प्रकार के होते हैं?
भारत में House Rent Agreement आमतौर पर 3 मुख्य प्रकार के होते हैं। जरूरत और अवधि के अनुसार सही एग्रीमेंट चुनना बहुत जरूरी है
1. Registered Rent Agreement (रजिस्टर्ड किराया समझौता)
भारत में Registered Rent Agreement को कानूनी मान्यता प्राप्त होती है, जिससे भविष्य में किसी भी प्रकार के विवाद की स्थिति में यह एक मजबूत सबूत के रूप में काम करता है। खासकर लंबे समय (11 महीने से ज्यादा) के किराए, पुलिस वेरिफिकेशन, बैंक, कोर्ट या सरकारी प्रक्रिया में Registered Rent Agreement की मांग की जाती है।
2. Notarized Rent Agreement (नोटरी किराया समझौता)
नोटरी किराया समझौता आमतौर पर कम अवधि (11 महीने तक) के किराए के लिए किया जाता है और इसे बनवाना Registered Rent Agreement की तुलना में आसान और कम खर्चीला होता है। हालांकि, इसकी कानूनी वैधता Registered Agreement से कम होती है, लेकिन सामान्य घरेलू उपयोग, बिजली-पानी कनेक्शन, गैस कनेक्शन और अन्य बुनियादी जरूरतों के लिए यह पर्याप्त माना जाता है।
3. Online Rent Agreement (ऑनलाइन किराया समझौता)
ऑनलाइन किराया समझौते की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें कागज़ी काम कम, समय की बचत और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होती है। कई राज्यों में यह सुविधा डिजिटल साइन, बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन और ई-रजिस्ट्रेशन के साथ उपलब्ध है, जिससे समझौते को कानूनी मान्यता भी मिलती है।
House Rent Agreement बनाने की प्रक्रिया (Step-by-Step)
House Rent Agreement बनाना मुश्किल नहीं है, बस सही क्रम और नियमों का पालन जरूरी होता है। नीचे पूरी प्रक्रिया आसान भाषा में बताई गई है
Step 1: किराया और शर्तें तय करें
सबसे पहले मकान मालिक और किरायेदार आपस में ये बातें स्पष्ट कर लें:
- मासिक किराया
- सिक्योरिटी डिपॉजिट
- एग्रीमेंट की अवधि (आमतौर पर 11 महीने)
- मेंटेनेंस और बिल्स की जिम्मेदारी
Step 2: जरूरी दस्तावेज तैयार करें
दोनों पक्षों के ये डॉक्यूमेंट तैयार रखें:
- आधार कार्ड / पैन कार्ड
- पासपोर्ट साइज फोटो
- एड्रेस प्रूफ
- प्रॉपर्टी से जुड़े कागज
Step 3: स्टाम्प पेपर या ई-स्टाम्प लें
राज्य के नियमों के अनुसार:
- फिजिकल स्टाम्प पेपर या
- ई-स्टाम्प पेपर पर एग्रीमेंट बनाया जाता है
Step 4: Rent Agreement ड्राफ्ट करें
अब एग्रीमेंट में शामिल करें:
- दोनों पक्षों का पूरा विवरण
- किराया, अवधि और नियम
- नोटिस पीरियड और समाप्ति शर्तें
चाहें तो वकील या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की मदद ले सकते हैं।
Step 5: साइन और गवाह
- मकान मालिक के साइन
- किरायेदार के साइन
- 2 गवाहों के साइन
यह स्टेप एग्रीमेंट को ज्यादा मजबूत बनाता है।
Step 6: नोटरी या रजिस्ट्रेशन (जरूरत अनुसार)
- 11 महीने तक → नोटरी कराना पर्याप्त
- 11 महीने से ज्यादा → सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में रजिस्ट्रेशन जरूरी
Step 7: कॉपी सुरक्षित रखें
- दोनों पक्ष अपनी-अपनी कॉपी रखें
- भविष्य के लिए डिजिटल कॉपी भी सेव करें
House Rent Agreement के लिए जरूरी दस्तावेज
- आधार कार्ड
- पैन कार्ड
- पासपोर्ट साइज फोटो
- प्रॉपर्टी के कागज
- एड्रेस प्रूफ
Rent Agreement Charges
| Agreement Type | Stamp Paper / Stamp Duty | Registration Fees | Notary Fees | Drafting / Service Charges | Total Approx. Cost | Legal Validity |
| Notarized Rent Agreement (11 महीने) | ₹100 – ₹200 | Not Required | ₹100 – ₹300 | ₹100 – ₹300 | ₹300 – ₹800 | Medium |
| Registered Rent Agreement | Annual Rent का 0.25% – 1% (State-wise) | ₹500 – ₹1,000 | Not Required | ₹500 – ₹2,000 (Agent Fees) | ₹1,500 – ₹5,000 | High |
| Online Rent Agreement | State-wise Stamp Duty (e-Stamp) | ₹500 – ₹1,000 (अगर शामिल) | Not Required | ₹1,000 – ₹2,500 (Platform Fees) | ₹1,500 – ₹4,000 | High |
| Simple Rent Agreement (Non-Notarized) | ₹50 – ₹100 | Not Required | Not Required | ₹100 – ₹200 | ₹150 – ₹300 | Low |
निष्कर्ष (Conclusion)
House Rent Agreement घर किराए पर देने और लेने की प्रक्रिया को सुरक्षित, पारदर्शी और कानूनी बनाता है। यह मकान मालिक और किरायेदार दोनों के अधिकारों और जिम्मेदारियों को स्पष्ट करता है, जिससे भविष्य में विवाद की संभावना कम हो जाती है।
इसलिए, घर किराए पर देने या लेने से पहले उचित शर्तों के साथ Rent Agreement जरूर तैयार करें और आवश्यकता अनुसार उसे रजिस्टर कराएंताकि आपका किराया लेन-देन पूरी तरह सुरक्षित रहे।
House Rent Agreement से जुड़े आम सवाल (FAQs)
क्या बिना एग्रीमेंट घर किराए पर दिया जा सकता है?
हां, लेकिन यह कानूनी जोखिम भरा होता है।
सिक्योरिटी डिपॉजिट कितनी होनी चाहिए?
आमतौर पर 1 से 2 महीने का किराया।
Rent Agreement ऑनलाइन बन सकता है?
हां, आज कई राज्य में Online Rent Agreement की सुविधा है।
